ईमेल क्या है? इसका आविष्कार कब और किसने किया

ईमेल क्या है? इसका आविष्कार कब और किसने किया

ईमेल आज के दौर में सर्वत्र प्रचलित संचार माध्यम है जिसके जरिए हर साल खरबों सन्देश भेजे जाते है। कहा जाए तो ईमेल ने ही इंटरनेट को एक अलग आयाम देने वाली टेक्नोलॉजी के रूप में काम किया है। लेकिन आपको यह जानकार हैरानी होगी की शुरुवात में इलेक्ट्रॉनिक मेल इंटरनेट पर आधारित नहीं थी। तो आइये जाने ईमेल क्या है और इसकी शुरुवात कब हुई:

ईमेल क्या है ?

ईमेल का पूरा नाम इलेक्ट्रॉनिक मेल है। इलेक्ट्रिक मेल इंटरनेट के जरिये सन्देश और सूचनाएं भेजने की सुविधा है। इसे कंप्यूटर कनेक्शन के मध्य भेजे जाने वाले सन्देश के रूप में भी परिभाषित किया जाता है। किसी भी ईमेल पते पर सूचनाएं भेजने व प्राप्त करने के लिए ईमेल आईडी होनी चाहिए। ये ईमेल आईडी किसी भी ईमेल प्रदाता से बनाई जा सकती है।

इंटरनेट पर कई तरह के ईमेल सर्विस उपलब्ध है जो ईमेल आईडी बनाने की सुविधा देते है। इनमे कुछ लोकप्रिय वेबमेल सर्विस है याहू मेल, जीमेल, जोहो मेल, आदि। इसके अलावा ईमेल को किसी भी डोमेन पर भी बनाई जा सकती है। एक ईमेल एड्रेस को उसके उपयोगकर्ता या संस्था अपने स्थाई ईमेल मेल पते के रूप में इस्तेमाल कर सकते है। जिस पर वे सन्देश व अटैचमेंट्स भेज और प्राप्त कर सकते है।

ईमेल आईडी क्या है?

एक ईमेल आईडी उपयोगकर्ता का यूनिक नाम होता है जिसे उपयोगकर्ता ईमेल खाता बनाते समय चुनता है। ये नाम उपयोगकर्ता की यूनिक पहचान होती है, इसलिए सभी ईमेल भिन्न भिन्न होते है। एक ईमेल आईडी name.surname@gmail.com के जैसे होती है और इसे बदला बदला नहीं जा सकता।

ईमेल का आविष्कार कब और किसने किया?

लोगों को ईमेल की पहली झलक ARPANET पर साल 1971 में देखने मिली जब अरपानेट पर बोल्ट बेरानेक बोल्ट और न्यूमैन टेक्नोलॉजीस कंपनी के शोधकर्ता रे टॉमलिंसन ने दुनिया में सबसे पहला ईमेल एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर पर भेजा। बता दे की अरपानेट इंटरनेट का शुरुवाती रूप है।

साल 1970 के दशक में ईमेल सुविधा के बढ़ते प्रचलन के कारण अरपानेट को भी बढ़ावा मिलने लगा। इसके चलते अरपानेट में नये-नये तकनिकी सुविधाएं जोड़े गए। आगे चलकर साल 1990 के दशक में इंटरनेट पूरी दुनिया में उपलब्ध होने लगे। इसके बाद तो मानो ईमेल अपने शिखर पर पहुंच गया।

ई-मेल पते में @ चिन्ह का उपयोग क्यों किया जाता है?

वर्तमान में हम जिस ईमेल पते का इस्तेमाल करते है उसमे @ चिन्ह का उपयोग पहली बार ईमेल के जनक रे टॉमलिंसन ने किया था। ईमेल में @ चिन्ह का उपयोग ईमेल नेटवर्क और सन्देश भेजने वाले उपयोगकर्ता के नाम के बिच के अंतर को आसान रखने के लिए किया गया था।

पहला वेबमेल सर्विस

इंटरनेट पर साल 1996 में सब्बीर भाटिया और जैक स्मिथ ने मिलकर सबसे पहला वेब आधारित ईमेल प्रोवाइडर हॉटमेल को आधिकारिक तौर पर लांच किया। इसके बाद तो मानो गूगल, याहू और माइक्रोसॉफ्ट जैसे कंपनियों में सबसे अच्छी सुविधाओं वाली ईमेल सर्विस देने की होड़ मच गया।

ईमेल कैसे काम करता है?

एक ईमेल आईडी username@domainname जैसे रहता है। जिसमे username प्राप्तकर्ता की पहचान होती है और डोमेन नाम एक डाक पते की तरह उस नेटवर्क का पता होता है।

ईमेल को लिखने के बाद प्राप्तकर्ता के ईमेल आईडी भरकर सेंड करने के बाद सारा काम ईमेल प्रदाता के प्रोग्राम का रहता है। इसमें सबसे मुख्य कार्य मेल सर्वर का होता है। मेल सर्वर के माध्यम से ईमेल भेजे व प्राप्त होते है यानी किसी भी मेल को मेल सर्वर ही उपयोगकर्ता तक पहुँचाने का कार्य करता है।

ईमेल अटैचमेंट क्या है एवं इसके उपयोग

इलेक्ट्रॉनिक मेल के साथ भेजी जाने वाली फाइलों को ही ईमेल अटैचमेंट्स कहा जाता है। मतलब ये वे कंप्यूटर फाइलें होती है जिन्हे सन्देश के साथ प्राप्तकर्ता को भेजे जाते है । किसी भी मेल के साथ एक या एक अधिक अटैचमेंट्स भेजे जा सकते है।

एक ईमेल के साथ उन सभी फाइलों को भेज सकते है जो जरुरी हो जैसे: डाक्यूमेंट्स, इमेज, फोटोग्राफ्स, ज़िप फाइल, साउंड फाइल, वर्ड डॉक्यूमेंट, इत्यादि। ध्यान रखने वाली बात ये है ईमेल पर अटैचमेंट भेजने के लिए फाइल साइज की एक तय सीमा होती है, मतलब ईमेल पर बड़ी बड़ी फाइलें नहीं भेजी जा सकती।

ईमेल के फायदे

इलेक्ट्रॉनिक मेल को पूरी दुनिया में कहीं भी बिना किसी असुविधा के भेजी जा सकती है। ईमेल को पहुंचने में लगभग कुछ ही मिनट का समय लगता है, लेकिन कई बार तो ये कुछ सेकंड में ही पहुँच जाता है। इसके साथ ही ईमेल भेजने में कोई भी शुल्क नहीं लगता। ईमेल इस्तेमाल करने के कई और भी फायदे है आइये जाने :

  • ईमेल तेज होते है और इन्हे भेजने के लिए कोई भी शुल्क नहीं लगता ना ही आईडी बनाने में।
  • यह एक चिठ्ठी की तरह यानि इसे भजने से पहले इसमें बदलाव की जा सकते है।
  • एक ही सन्देश को एक साथ कई लोगो तक भेजा जा सकते है।
  • डाक्यूमेंट्स फाइलें आसानी से भेजी जा सकती है।
  • सभी इमेल्स रिकॉर्ड के तौर पर मेल बॉक्स में सुरक्षित होते है।
  • ये टेलीफोन पर बातचीत का एक विकल्प है। साथ ही यह व्यक्तिगत पता होता है।
  • टेलीफ़ोन की तरह इसमें व्यस्त लाइन जैसी समस्या नहीं होती
  • इसे कभी भी भेज सकते है।

ईमेल के नुकसान

वेबमेल में कोई भी किसी को भी ईमेल कर सकता है। इनमे जंक मेल और स्पैम जैसी समस्याएं होती है। चूँकि ईमेल आईडी बनाने व भेजने व प्राप्त करने में कोई भी शुल्क नहीं लगता इसलिए स्कैमर्स और विज्ञापन के मेल की संख्या बढ़ते जाते है जिसकी वजह से परेशानी भी होती है। तो आयें जानें इसमें कुछ नुकसानों के बारे में :

  • जंक मेल – विज्ञापनों और स्कैम्स वाले इमेल्स।
  • स्पैम मेल की समस्या।
  • कई ईमेल प्रोवाइडर्स प्रोवाइडर्स फ्री सुविधा देने के लिए विज्ञापन पर आश्रित होते है।
  • लुभावने ऑफर व प्रस्ताव। इससे बचने के लिए कोई भी सौदा आमने सामने करें
  • संदेशों को दुसरो तक पहुँचाया जा सकता है

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