DNS क्या है और कितने प्रकार के होते हैं?

DNS kya hai

कम्प्यूटर्स संख्याओं की भाषा समझते है। इसलिए इंटरनेट में भी कम्प्यूटर्स के बीच संचार नम्बरो की श्रृंखला के आधार पर ही होता है। इंटरनेट के शुरुवाती दिनों में किसी वेबसाइट पर विजिट करने के लिए IP एड्रेस का उपयोग किया जाता था। जो की याद रखने में आसान नहीं होते है। इसलिए DNS को बनाया गया। जो लोगो की सहूलियत के लिए बनाये गए फ़ोन बुक की तरह है। जब आप अपने ब्राउज़र में डोमेन नाम एंटर करते है तो DNS इसे कम्प्यूटर्स के पढ़ने लायक यानि IP एड्रेस में अनुवाद करता है।

DNS क्या है? (What is DNS in hindi)

DNS का पूरा नाम Domain name system हैं। DNS का काम Domain name को IP address में परिवर्तित करना होता है। जब हम किसी भी Domain name को Web Browse में type करते हैं तो ये DNS उसको IP address में Convert करता हैं। इसी प्रकार किसी भी नेटवर्क में किसी भी कंप्यूटर एवं होस्ट नेम को भी ये IP address में Convert करता है। यह इस लिए होता हैं क्योंकि हम IP address की तुलना में नाम आसानी से याद रख सकते हैं।

एक उदाहरण के तौर पर जब हम www.example.com को ब्राउज़र में टाइप करते हैं तो DNS इसको 198.15.45.18 में या इसी प्रकार के किसी valid IP address में change कर देता है। IP to Name and Name to IP.

DNS का इतिहास (history of DNS)

Paul Mockapetris नाम के कंप्यूटर वैज्ञानिक ने साल 1980 में डोमेन नेम सिस्टम का निर्माण किया, ताकि आईपी एड्रेस को ह्यूमन लैंग्वेज में बदला जा सके। इसके पहले का वक्त यानी कि आज से लगभग 40-50 साल पहले जब इंटरनेट का उपयोग बहुत कम होता था तब आईपी एड्रेस से वेब ब्राउजिंग और सर्फिंग की जाती थी।

लेकिन जैसे-जैसे इंटरनेट के उपयोग में तेजी होने लगी और इसका आकार बढ़ते गया तब आईपी एड्रेस को याद रखना काफी मुश्किल होता गया। इसलिए Paul Mockapetris ने 1980 में डोमेन नेम सिस्टम का आविष्कार किया ताकि आईपी एड्रेस की जगह सीधे वेब ब्राउज़र में डोमेन नेम लिखकर सर्फिंग और ब्राउज़िंग की जा सके। इंटरनेट में डोमेन नेम space tree को तीन भागों में विभाजित किया गया है

(a). Generic Domain

generic domain name ऐसे नामों को कहते हैं जो किसी साधारण रूप से हर डिक्शनरी में मिल जाता हैं जैसे cherry.com या bike.com जेनेरिक डोमेन नेम को आसान नाम की वजह से याद रखना आसान होता है बजाय ऐसे नामों के जो थोड़ा मुश्किल होता है जैसे कि dream11play.com। जेनेरिक डोमेन की सहायता से उसके नाम से ही वेबसाइट की डाटा सामग्री का पता चलता है। जेनेरिक डोमेन कुछ इस प्रकार के होते हैं।

LabelDescription
.govgovernment institutions (सरकारी संस्था)
.eduEducational institutions (शैक्षणिक संस्था)
.netnetwork support centres (नेटवर्क सपोर्ट सेंटर)
.comcommercial organization.
.orgnon profit organization.
.inetinternational organisations.
.infoinformation service provider.
.firmfirms (व्यापार)

(b). Country domain

देश के नाम वाले डोमेन अपने देश के नाम पर सुरक्षित रखे जाते हैं यह मुख्यत अक्षर में होते हैं जैसे,

Label Description
.inIndia
.usUnited State
.pkPakistan

(C). Inverse domain

inverse डोमेन का उपयोग किसी नाम के पते को मैपिंग करने के लिए किया जाता है।

DNS कैसे काम करता है? (how works DNS)

DNS System IP address को मानव भाषा में ट्रांसलेट करता है। IP ऐड्रेस नंबर्स पर आधारित है DNS System numbers को मानव भाषा में परिवर्तित करता है ताकि Web browsing करते वक्त उपयोगकर्ता सीधे डोमेन नेम यानी की वेबसाइट का नाम लिखकर ब्राउज़िंग या सर्फिंग कर सके। DNS क्या है यह जान लेने के बाद अब आप यह जान ले कि DNS कितने प्रकार के होते हैं

Domain name system के प्रकार

DNS server 4 प्रकार के होते हैं।

  1. DNS resolver – DNS resolver ISP(internet service provider) के द्वारा प्राप्त किया जाता है।
  2. Root name server – इसे 12 अलग-अलग ऑर्गेनाइजेशन कंट्रोल करती है और इसका उपयोग पूरी दुनिया में होता है। Informational pages बनाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। उदाहरण – www.root-servers.org
  3. TLD name server – इस सरवर में सभी डोमेन नेम और वेबसाइट्स की जानकारी स्टोर रहती है। उदाहरण- .com, .net, .in, .edu
  4. Authoritative name server – इसमें वेबसाइट की आईपी ऐड्रेस स्टोर रहती है।

IP address और domain name में अंतर

Domain name system क्या है में आपने जाना कि DNS में IP address और domain name की अहम भूमिका होती है। DNS में IP address और domain name का कार्य एक जैसा ही हैं। लेकिन IP address नंबर्स पर आधारित होते है और इसे याद रखना थोड़ा मुश्किल है परन्तु डोमेन नेम नाम पर आधारित होते है इसलिए इन्हे याद रखना काफी आसान है।

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